प्लास्टिक प्रदूषण रोकने में बच्चों की भागीदारी: संजय रस्तोगी

Sanjay Rastogi

प्लास्टिक की थैलियां और अन्य प्लास्टिक उत्पाद आज हमारे समाज में एक गंभीर प्रदूषण का कारण बन रहे हैं। यह न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि समाज के हर नागरिक के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। मानवाधिकार न्यूज़संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय रस्तोगी जी ने प्लास्टिक प्रदूषण की रोकथाम के लिए एक अनूठा विचार प्रस्तुत किया है।

बच्चों की भूमिका:

संजय रस्तोगी जी का कहना है कि बच्चे प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने अपील की है कि बच्चे चिप्स, कुरकुरे, बिस्किट और अन्य प्लास्टिक पैकिंग वाली थैलियां इकट्ठा करें और इन्हें सही जगह जमा करें। यह सुनिश्चित करें कि ये थैलियां सड़कों, नालियों, या सार्वजनिक स्थलों पर न फेंकी जाएं।

उद्देश्य:

स्वच्छता: प्लास्टिक कचरे को सही तरीके से प्रबंधित कर अपने क्षेत्र को स्वच्छ रखना।

प्रेरणा: बच्चों में पर्यावरण संरक्षण की आदत विकसित करना।

सम्मान: इस कार्य में भाग लेने वाले बच्चों को मानवाधिकार न्यूज़ की तरफ से सम्मानित किया जाएगा।

अपील:

श्री संजय रस्तोगी जी ने कहा कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वे प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने में योगदान दें। बच्चों के इस प्रयास को न केवल प्रोत्साहित किया जाएगा, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी जाएगा। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को इस अभियान में भाग लेने के लिए प्रेरित करें।

निष्कर्ष:

यदि हर नागरिक, खासकर बच्चे, इस जिम्मेदारी को निभाते हैं, तो हम प्लास्टिक प्रदूषण के खतरे को कम कर सकते हैं और अपने पर्यावरण को सुरक्षित बना सकते हैं। यह पहल न केवल समाज में जागरूकता फैलाएगी, बल्कि भविष्य की पीढ़ी को एक बेहतर पर्यावरण का उपहार देगी।

चंदौली। मुगलसराय कस्बा अंतर्गत काली महाल
चतुर्भुजपुर में शराब पीने के दौरान दो दोस्तों में मारपीट
हो गई। एक ने दूसरे के सिर पर डंडे से प्रहार कर दिया।
हालांकि आरोपी खून से लथपथ अपने दोस्त को लेकर
अस्पताल भी पहुंचा जहां थोड़ी देर बाद उसकी मौत हो
गई। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है।

मानवाधिकार न्यूज़ की ओर से मज़दूरों को समर्पित एक अपील
“फिर से चाहिए 8 घंटे का अधिकार –
मज़दूर न किसी का ग़ुलाम है, न कोई व्यापार!”

आज 1 मई – अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस है। यह वह दिन है जब पूरी दुनिया उन मेहनतकश हाथों को सलाम करती है, जिन्होंने अपने खून-पसीने से दुनिया का निर्माण किया है।
लेकिन आज एक बार फिर वही सवाल खड़ा है –
क्या हमारे मज़दूरों को वह सम्मान, वह अधिकार मिल पा रहे हैं जिसके लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी थी?

1886 में अमेरिका के शिकागो में जब मज़दूरों ने 8 घंटे की शिफ्ट के लिए अपनी जानें दीं, तब जाकर यह अधिकार मिला।
मगर आज फिर वही मज़दूर 12 से 18 घंटे काम करने को विवश है –
कम मज़दूरी, ज़्यादा काम, और सम्मान शून्य।

मानवाधिकार न्यूज़ की ओर से हम यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं:

8 घंटे का काम मज़दूर का हक़ है, एहसान नहीं।

हर श्रमिक को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, और काम का सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए।

मज़दूर को कोई ठेके का सामान न समझें – वह भी एक इंसान है, जिसके सपने हैं, परिवार है, और जीने का हक़ है।


आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है –
मज़दूरों की आवाज़ को फिर से बुलंद करना।
उनके हक़ के लिए एकजुट होना।

हमारा संकल्प:
“रोटी भी चाहिए, इज़्ज़त भी चाहिए,
इंसान हैं हम – गुलाम नहीं!”

आपका
संजय रस्तोगी
राष्ट्रीय अध्यक्ष – मानवाधिकार न्यूज़

डीडीयू नगर 6 लेन के लिए धरना मामला….
हाथो में तिरंगा लिए जीटीरोड पर उतरा जनसैलाब।

4 लेन के विरोध में चल रहा धरना प्रदर्शन।

पत्रक देकर अधिकारियों को कराया मांगो से अवगत।

भारी पुलिस बल मौके पर,रोकने के बावजूद नही रुके लोग।

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