डीडीयू नगर चंदौली। आज बुधवार को गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी व सिख्ख समाज द्वारा  दशो पातशाहियो की अलौकिक जागृत ज्योत धन-धन श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी महाराज  का पावन पवित्र पहला प्रकाश पर्व दिन बुधवार को गुरूद्वारा साहिब जी.टी. रोड पर रात  तक मनाया गया।

डीडीयू नगर चंदौली। आज बुधवार को गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी व सिख्ख समाज द्वारा  दशो पातशाहियो की अलौकिक जागृत ज्योत धन-धन श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी महाराज  का पावन पवित्र पहला प्रकाश पर्व दिन बुधवार को गुरूद्वारा साहिब जी.टी. रोड पर रात  तक मनाया गया। समाप्ति के उपरांत साध- संगत के लिए गुरू का अटूट लंगर वितरित किया गया। इस दौरान हजुरी रागी जत्था भाई जयपाल सिंह द्वारा अपने शब्द कीर्तन से उपस्थित साध संगत को निहाल किया। वहीं गुरु घर के वजीर भाई अमरजीत सिंह ने पाठ पूजा के उपरांत प्रकाश पर्व पर अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान रणजीत सिंह, जनरल सेक्रेटरी सरदार महेंद्र सिंह पत्रकार, रामेंद्र सिंह, अमरीक सिंह, गुरदयाल सिंह, राजेंदर सिंह, गुलशन अरोड़ा, मनमीत सिंह राजन, बलबीर सिंह लकी सुखविंदर सिंह लकी सिंह  रोहित सचदेवा सुखविंदर सिंह कर्मवीर सिंह गगन सिंह राजा सुरजीत सिंह हैप्पी सिंह लांगरी आदि लोग मौजूद रहे

रिपोर्ट – राहुल मेहानी

मानवाधिकार न्यूज़ की ओर से मज़दूरों को समर्पित एक अपील
“फिर से चाहिए 8 घंटे का अधिकार –
मज़दूर न किसी का ग़ुलाम है, न कोई व्यापार!”

आज 1 मई – अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस है। यह वह दिन है जब पूरी दुनिया उन मेहनतकश हाथों को सलाम करती है, जिन्होंने अपने खून-पसीने से दुनिया का निर्माण किया है।
लेकिन आज एक बार फिर वही सवाल खड़ा है –
क्या हमारे मज़दूरों को वह सम्मान, वह अधिकार मिल पा रहे हैं जिसके लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी थी?

1886 में अमेरिका के शिकागो में जब मज़दूरों ने 8 घंटे की शिफ्ट के लिए अपनी जानें दीं, तब जाकर यह अधिकार मिला।
मगर आज फिर वही मज़दूर 12 से 18 घंटे काम करने को विवश है –
कम मज़दूरी, ज़्यादा काम, और सम्मान शून्य।

मानवाधिकार न्यूज़ की ओर से हम यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं:

8 घंटे का काम मज़दूर का हक़ है, एहसान नहीं।

हर श्रमिक को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, और काम का सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए।

मज़दूर को कोई ठेके का सामान न समझें – वह भी एक इंसान है, जिसके सपने हैं, परिवार है, और जीने का हक़ है।


आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है –
मज़दूरों की आवाज़ को फिर से बुलंद करना।
उनके हक़ के लिए एकजुट होना।

हमारा संकल्प:
“रोटी भी चाहिए, इज़्ज़त भी चाहिए,
इंसान हैं हम – गुलाम नहीं!”

आपका
संजय रस्तोगी
राष्ट्रीय अध्यक्ष – मानवाधिकार न्यूज़

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